आग लगाके तनमे सावन दौड रहा आंगनमे सावन सावनकी यादोंमे खोकर डूब गया सावनमे सावन बहते झरने नाच रहे है महक रहा है धुनमें सावन प्यारभरी महकी बातोंको ढुंढ रहा है बनमे सावन शायरकी अनमोल अमीरी देख रहा साजनमे सावन