गम छा गया …. गया रे …राजी बिवी.. मिया रे … जल छान लो कुएका ..बन मे कहे सिया रे … गमछा नहीं पुराना..गमछा धवल नया रे … गा गा ल गा ल गा गा..सरगम पिया पिया रे… रंगीन ये समा है ..गाता मधुर जिया रे … साकी सरस्वती है ..दीपावली दिया है … हैं…
कागज ख़राब है तो भी लिखना मना नहीं है मैली किताब है तो भी लिखना मना नहीं है लिखनेसे दिल भरेगा सदियोंसे लिख रहीं हूँ मुरझा गुलाब है तो भी लिखना मना नहीं है साकी खड़ी है कबसे हाथोमे जाम लेकर स्याही शराब है तो भी लिखना मना नहीं है हम है दिवाने आपके क्या…