हो गए है हम इकट्ठा इस जहाँपर
खेलते है कौन सट्टा इस जहाँपर
गायका गा बैलका बै शेर बब्बर
सोच ले फिर मार रट्टा इस जहाँपर
लोग ज्ञ्यानी पालते संगणक हाथी
मत खिलाओँ आम खट्टा इस जहाँपर
पेड़ पत्ते गुणगुणाते भँवर काले
झीलसा नीला दुपट्टा इस जहाँपर
साथ मै सचके रहूंगी फ़िक्र ना कर
माँ “सुनेत्रा” कालकट्टा इस जहाँपर