बासुरीमे कलम रख दे
कडक परखड शब्दशर दे
कौनसी असली अलामत
ओळखाया सत परख दे
गज़लियत पर काफिया स्वर
जाणता आत्मा अलख दे
लाखसे भर हुट्ट बाटी
सूत काताया चरख दे
सहज मेरे कर्म छूटे
निर्जरा मैत्री निखळ दे
पलक पायल छेड़ सरगम
शांत जगण्या श्वास दम दे
मोक्षमुक्तीका “सुनेत्रा”
मार्ग हृदयी मम धवल दे