गरिमाधुर्य – GARIMAADHURYA


गरिमाधुर्य.. अधरी धरी .. री हरी … अधरी धरी… .
बासुरी धन्वंतरी री हरी.. अधरी धरी …..

पांगलेल्या सावल्यांची .. भाषणे भाषांतरे …..
छापावया शाई भरी.. री हरी अधरी धरी…..

कुरणावरी गाई म्हशी ..घुंगरे कंठातली …..
शांत समयी झरण्या सरी .. री हरी अधरी धरी…..

रेष आभाळात काळी.. पाखरांची चालली …..
प्रतिबिंब हलते निर्झरी.. री हरी अधरी धरी…..

चलन ब्रह्मांडी फिरे मम.. अक्षरे अंकांतुनी…..
मी “सुनेत्रा” आहे खरी . री हरी अधरी धरी…..

 

 

 


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