प्रथम तू झोड मिथ्य पेल कलम
प्रथम तू ठोक मिथ्य झेल कलम
विझवुनी मिथ्य ती खुळी मशाल
प्रथम तू रोख मिथ्य रेल कलम
धर पुरी काजळी पुसावयास
प्रथम तू सोड मिथ्य झेल कलम
गझल तव दौडते सम्यक भरात
प्रथम तू तोड मिथ्य जेल कलम
चल खडे ढोंग आज पाडण्यास
प्रथम तू फोड मिथ्य बेल कलम
जल किती नासतेय ती नळीत
प्रथम तू ओढ मिथ्य डेल कलम
जिन ध्वजा पेललीय ब्रह्मचर्य
प्रथम तू खोड मिथ्य वेल कलम
गझल अक्षरगणवृत्त (मात्रा १७)
लगावली – लललगा/गाल/गाल/गाल/गाल/